तत्वज्ञान
कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन।
कबीर परमात्मा जी का बताया परम गूढ़ ज्ञान
कबीर परमात्मा ने अध्यात्म के बहुत से गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठाते हुए बताया है कि भक्ति को जिंदा रखने के लिए मैंने ही द्रोपदी का चीर बढ़ाया था और मैंने ही हिरण्यकश्यप तथा कंस को मारा था।


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