कृष्ण जन्माष्टमी 2020 :-
इस कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते है कि श्री कृष्ण जी की लीलाओं और कबीर परमेश्वर जी की लीलाओं में क्या समानता है?
क्या श्री कृष्ण जी की भक्ति मीरा बाई ने आजीवन की?
मीरा बाई ने अपने जीवन काल मे रविदास जी को अपना गुरु बनाया था।
रविदास जी ने उन्हें श्री कृष्ण से ऊपर अविनाशी परमात्मा के बारे में बताया।
मीरा बाई जी श्री कृष्ण जी से साक्षात्कार करती थी, उन्होंने इस विषय में उनसे पूछा तो श्री कृष्ण जी ने बताया कि ऐसी शक्ति है पर उसे प्राप्त करना आसान नही है।
मीरा बाई ने रविदासजी जी से उपदेश लिया और उन अविनाशी परमात्मा की भक्ति की वो और कोई नही कबीर परमात्मा है।
रविदास जी कबीर साहेब जी की भक्ति करते थे और उनके शिष्य थे उन्होंने ही मीरा बाई को इस परमपिता परमेश्वर की भक्ति साधना दी
कृष्ण जी की लीलाओं में एक और यह भी लीला थी जब उन्होंने राजा युधिष्ठिर जी को भयभीत करने वाले स्वपन से मुक्त कराने के लिए अश्वमेघ यज्ञ करने की सलाह दी।
इस यज्ञ को सम्पन्न कराने के लिए धरती पर जितने भी तेजस्वि ऋषि तथा साधु थे सबको आमंत्रित किया गया।
अन्ततः यह यज्ञ एक सुपच सुदर्शन ऋषि के द्वारा पूर्ण हुआ जो उस समय करुणामय नाम से आए कबीर परमेश्वर जी के शिष्य थे।
विचार करने वाली बात है श्री कृष्ण जी की उपस्थिति में भी पांडवो को यज्ञ पूरा नही हुआ, उन्होंने स्वयं सुपच सुदर्शन जी की शक्ति को तीन लोक से शक्तिशाली बताया।
श्री कृष्ण जी की एक और लीला हमने सुनी है कि उन्होंने अपने मित्र सुदामा के एक मुट्ठी चावल खा कर उनका महल बना दिया।
लेकिन यदि हम कबीर परमेश्वर जी की लीलाएँ देखे तो उन्होंने तैमूरलंग की एक रोटी के बदले उसे सात पीढ़ी का राज दे दिया।
इन सभी श्री कृष्ण लीलाओ तथा कबीर परमेश्वर जी की लीलाओं को देखकर यह सिद्ध होता है कि कबीर साहेब जी ही अविनाशी परमात्मा है जो अपने साधक को सर्व सुख देने में समर्थ है।
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