कहते है इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था उसी के उपलक्ष्य में जन्माष्टमी को मनाया जा रहा है।
इस दिन को मनाने के पीछे कोई सुख भी मिलता है या हम यूँही परम्परा के तहत जन्माष्टमी को मानते आ रहे है??
आइये जानते है
जन्माष्टमी के दिन को मनाने से कोई लाभ नही है बल्कि भक्ति करने से लाभ मिलता है।
यदि उस दिन विशेष को भी आप मनाना चाहते है तो इसे अपने मनोरंजन के तहत न मनाए इसे अधिकाधिक भक्ति करके बताएं।
दूसरा विचारणीय विषय है
क्या भगवान का कभी जन्म होता है ?
जी नहीं! पूर्ण परमात्मा अविनाशी अमर है उनका कभी जन्म मरण नही होता है।
श्री कृष्ण जी तीन लोक के देवता है और सतोगुणी है ।
परन्तु अविनाशी परमेश्वर नही है।
इसका प्रमाण गीता अध्याय 10 श्लोक 12 गीता अध्याय 5 श्लोक 4 और 9 आदि स्थानों पर मिलता है कि मे गीता ज्ञान दाता कहता है कि अर्जुन तेरे और मेरे अनेको जन्म हो चुके है तथा आगे भी होते रहेंगे?
वह अविनाशी परमात्मा कौन है जिसके बारे में गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा गया है कि अर्जुन तू उस अविनाशी परमात्मा की शरण मे जा उसकी कृपा से ही तू उस सनातन लोक को प्राप्त होगा जंहा जाकर तेरा जन्म मरण नही होगा।

















