Tuesday, 14 July 2020

गुरू बिना मोक्ष नही

गुरु बिना  मोक्ष असम्भव है।

  • गुरु के बिना कौन हमे सत्य और असत्य के मध्य अंतर स्पष्ट कराएगा।
  • गुरु ही वह रास्ता है जो हमे मंजिल (परमेश्वर) से मिलाता है।
  • गुरु के बिना ज्ञान नही मिल सकता, फिर मोक्ष कैसे संभव है?

कबीर जी कहते है :-
                   कबीर गुरु बिन ,काहू न पाया ज्ञाना।
                   जो थोथा भुस छड़े , मूड किसाना।।

भावार्थ:- गुरु के बिना ज्ञान नही मिल सकता है। जिस प्रकार किसान अपनी अज्ञानता वश खाली भुस को ही पिटता है जिससे कुछ भी अन्न प्राप्त नही होता है।

  • भगवान राम , कृष्ण ने भी अपने समय मे गुरु बनाया था फिर हमारी गुरु के बिना भक्ति कैसे सफल हो सकती है?
             
 कबीर राम कृष्ण से कौन बड़ा, तीनहुं भी गुरु कीन्ह। तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन।।


  • गुरु वह दीपक प्रदान करते है जिसके सहारे हम कभी भी अंधेरे में नही भटक सकते ।
     
  कबीर पीछे लाग्या जाऊं था,मैं लोकवेद के साथ।
    रास्ते मे सतगुरु मिले, दीपक दे दिया हाथ।।



वर्तमान में हमारे सामने यह समस्या उभरती है कि वास्तविक गुरु और नकली गुरु में भेद कैसे करे?

वास्तविक गुरु के निम्न लक्षण होते है :- 

1. वास्तविक गुरु या पूर्ण गुरु एक समय मे एक ही होता है जो गुप्त मंत्रो का उजागर करता है (वेदो के अनुसार)।

2. वास्तविक गुरु तीन बार मे अपने साधक को नाम दीक्षा देता है।



3. वास्तविक गुरु सभी शास्त्रो के आधार पर भक्ति मार्ग देता है।

कबीर गुरु के लक्षण कहूँ, मधुरे बेन विनोद।
चार वेद षठ शास्त्र वो कहे अठारह बोध।।

4. गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में तत्वदर्शी संत के लक्षण बताएं गए है।

वह संत तत्वदर्शी संत होगा जो उल्टे लटके संसार रूपी वृक्ष (जिसके झड़े ऊपर तथा पत्तियां नीचे है) के सभी विभागों को झड़ से पत्तो सहित विस्तार से बताएगा।

कबीर साहेब जी ने इसे अपनी वाणी में स्पष्ट कर दिया:~ 

कबीर अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार।
      तीनो देवा शाखा है, पात रूप संसार।।



5. गीता अध्याय 16 श्लोक 23 व 24 में स्पष्ट किया गया है कि शास्त्र विधि को त्याग कर जो मनमाना आचरण करते है उन्हे न तो कोई सुख प्राप्त होता है,न ही उनकी गति अर्थात  मोक्ष होता है।

वर्तमान में वास्तविक पूर्ण गुरु केवल संत रामपाल जी महाराज जी है।

इन्होंने आज सर्व सद्ग्रन्थों , वेदों तथा पुराणों के आधार पर वास्तविक भक्ति मार्ग दिया है।

इस सच्ची भक्ति से आज उनके करोड़ो अनुयायियों को अनगिनत लाभ भी मिले है।




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Wednesday, 8 July 2020

शिवरात्रि 2020

शिवरात्रि 2020

शिवरात्रि के व्रत का महत्व 

शिवरात्रि श्रावण मास में आती है।

इस मास का प्रारम्भ 6 जुलाई सोमवार 2020 से 2 अगस्त सोमवार 2020 को ख़तम होता है। 

इसी महीने में ही शिव जी को पाने के लिए पार्वती जी ने कठोर तपस्या की थी।

शिव जी ने इसी महीने में विष पान किया था, जिसे शांत करने के लिए इंद्र ने कैलाश पर्वत पर वर्षा की थी।



क्या व्रत करना शास्त्र अनुसार सही है?  

गीता जी के अध्याय 16 मंत्र 23 में प्रमाण है कि शास्त्र के अनुसार भक्ति नही करने से न तो हमे सुख प्राप्त होता है, न ही हमारी गति अर्थात मोक्ष होता है।

गीता अध्याय 6 मंत्र 16 में स्पष्ट कहा गया है कि यह योग और साधना केवल उन्हीं की सफल होती है जो न अधिक सोता हो, न कम सोता हो।  ना अधिक खाता हो, न कम खाता हो (कम खाना यानी व्रत करना)।




क्या भगवान शिव की भी जन्म मृत्यु होती है?

जी, हाँ भगवान शिव अजर अमर अविनाशी नही है उनका भी जन्म मरण होता है।

इसका प्रमाण श्रीमद्भदेवीभगवत गीता के स्कन्ध 3 पृष्ठ 123 पर स्पष्ट लिखा की ब्रम्हा विष्णु और महेश का भी जन्म और मृत्यु होती है।

वही भगवान शिव भी स्वयं कहते है कि मेरा जन्म होता है मैं अविनाशी नही हूँ।



कबीर साहेब जी ने अपनी वाणी में भी कहा है कि


          तीन देवो की जो करते भक्ति
                                उनकी कभी न होवे मुक्ति



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Wednesday, 1 July 2020

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन 

नमस्कार दोस्तो,

आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से जानते है कि

 क्यो मनाया जाता है रक्षा बंधन ?

किस प्रकार आरम्भ हुआ रक्षा बंधन पर्व?

क्या है इसके लाभ और हानियां?

और कौन है हमारा असली रक्षक ?


1. क्यों मनाया जाता है रक्षा बंधन?

दोस्तो, रक्षा बंधन एक भारतीय उत्सव है जिसे प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
रक्षा बंधन मनाने के पीछे मुख्य उधेश्य यह है कि भाई अपनी बहन की मुसीबत में उसकी रक्षा करेगा।
 इस प्रकार यह हिन्दू धर्म मे भाई बहन के मध्य प्रेम का द्योतक है ।

2. किस प्रकार आरम्भ हुआ रक्षा बंधन पर्व?

रक्षा बंधन के पर्व का आरंभ चितौड़ पर गुजरात के बहादुरशाह द्वारा आक्रमण करने पर की रानी कर्मवती द्वारा दिल्ली के बादशाह हुमायु को रक्षा सूत्र भेजने से हुआ परन्तु उस समय हुमायूँ ने हिन्दुओ को काफ़िर मानते हुए रानी कर्मवती की सहायता नही की।

रक्षा बंधन
रक्षा बंधन


3. क्या है इसके लाभ और हानियां?

यदि दोस्तो हम रक्षा बंधन पर्व के लाभ और हानियो कि बात करे तो अक्सर यह देखा जाता है कि 

इस दिन भाई बहन आपस मे रक्षा बंधन मनाते हुए अपने रिश्ते को और भी गहरा बनाते है।
परन्तु विचार करे जिस बहन के भाई नही हो या जिस भाई के बहन न हो उसे कितनी पीड़ा होती होगी तथा स्वयं अभाहीन समझती होगी।

4. कौन है हमारा असली रक्षक ?

दोस्तो हम जानते है कि भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए हर जगह तो मौजूद नही रह सकता। यदि ऐसा होता तो आज हमारे देश मे इतने बलात्कार और किशोर अपराध जैसी घटनाएं न होती।

हमारा असली रक्षा परम पिता परमात्मा है जिसकी भक्ति करने से वह हर परिस्थिति में हमारी सहायता करता है।


वह परमात्मा कबीर साहेब जी है जिसके बारे में वेद भी बताते है, यही सबके रक्षक है ।

कबीर परमात्मा
कबीर परमात्मा



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जन्माष्टमी कितनी लाभदायक

जन्माष्टमी हिंदू त्यौहारों में से एक है और काफी उत्साह के साथ इसे भद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्ठमी को मनाई जाती है। कहते है इस दिन भगवान श...