Wednesday, 24 June 2020

जगन्नाथ धाम

जगन्नाथ धाम का रहस्य


आइये जानते है जगन्नाथ धाम का वह रहस्य जिससे हम आज तक अनभिज्ञ थे।


1. जगन्नाथ धाम में स्थित मंदिर को छः बार समुद्र द्वारा तोड़ा गया तथा सातवी बार इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

2. जगन्नाथ धाम में स्थित मंदिर को समुद्र द्वारा अपना प्रतिशोध (जब त्रेता युग मे भगवान श्री राम ने समुद्र के ऊपर पुल बनाया था तब समुद्र द्वारा रास्ता न देने पर श्री राम ने अग्नि बाण से इसे समाप्त करने की ठान ली)  लेने के लिए तोड़ा गया था।

जगन्नाथ धाम रहस्य
जगन्नाथ धाम रहस्य



3. जगन्नाथ धाम में मूर्ति का निर्माण उस समय करुणामय नाम से आए कबीर परमेश्वर ने करवाया था।

4. करुणामय रूप में आए कबीर परमेश्वर ने इस मंदिर में छूआ छूत रोकने तथा केवल हरि के गुणगान अपने शास्त्रो के आधार पर करने को कहा।

जगन्नाथ धाम रहस्य
जगन्नाथ धाम रहस्य



5. जगन्नाथ धाम के पांडे ने एक क्षुद्र व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश देने पर इंकार कर दिया, जिसके फलस्वरूप उसे कोड लग गया इस रोग से छुटकारा उन्हें क्षुद्र ब्राम्हण के पैर धो कर पीने से मिला।

6. परमेश्वर करुणामय द्वारा इस मंदिर की मूर्ति बनाते समय किसी को प्रवेश न होने को कहा गया परन्तु कार्य सम्पन्न होने से पहले ही दरवाजा खोल देने से मूर्ति के हाथ तथा पैर नही बने।

जगन्नाथ धाम रहस्य
जगन्नाथ धाम रहस्य



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Wednesday, 17 June 2020

कृष्ण लीला

कृष्ण जन्माष्टमी 2020 :- 

इस कृष्ण जन्माष्टमी पर जानते है कि श्री कृष्ण जी की लीलाओं और कबीर परमेश्वर जी की लीलाओं में क्या समानता है?

 क्या श्री कृष्ण जी की भक्ति मीरा बाई ने आजीवन की?


मीरा बाई ने अपने जीवन काल मे रविदास जी को अपना गुरु बनाया था।

रविदास जी ने उन्हें श्री कृष्ण से ऊपर अविनाशी परमात्मा के बारे में बताया।

मीरा बाई जी श्री कृष्ण जी से साक्षात्कार करती थी, उन्होंने इस विषय में उनसे पूछा तो श्री कृष्ण जी ने बताया कि ऐसी शक्ति है पर उसे प्राप्त करना आसान नही है।

मीरा बाई ने रविदासजी जी से उपदेश लिया और उन अविनाशी परमात्मा की भक्ति की वो और कोई नही कबीर परमात्मा है।

रविदास जी कबीर साहेब जी की भक्ति करते थे और उनके शिष्य थे उन्होंने ही मीरा बाई को इस परमपिता परमेश्वर की भक्ति साधना दी

कृष्ण लीला


कृष्ण जी की लीलाओं में एक और यह भी लीला थी जब उन्होंने राजा युधिष्ठिर जी को भयभीत करने वाले स्वपन से मुक्त कराने के लिए अश्वमेघ यज्ञ करने की सलाह दी।

इस यज्ञ को सम्पन्न कराने के लिए धरती पर जितने भी तेजस्वि ऋषि तथा साधु थे सबको आमंत्रित किया गया।

अन्ततः यह यज्ञ एक सुपच सुदर्शन ऋषि के द्वारा पूर्ण हुआ जो उस समय करुणामय नाम से आए कबीर परमेश्वर जी के शिष्य थे।

विचार करने वाली बात है श्री कृष्ण जी की उपस्थिति में भी पांडवो को यज्ञ पूरा नही हुआ, उन्होंने स्वयं सुपच सुदर्शन जी की शक्ति को तीन लोक से शक्तिशाली बताया।



श्री कृष्ण जी की एक और लीला हमने सुनी है कि उन्होंने अपने मित्र सुदामा के एक मुट्ठी चावल खा कर उनका महल बना दिया।

लेकिन यदि हम कबीर परमेश्वर जी की लीलाएँ देखे तो उन्होंने तैमूरलंग की एक रोटी के बदले उसे सात पीढ़ी का राज दे दिया।



इन सभी श्री कृष्ण लीलाओ तथा कबीर परमेश्वर जी की लीलाओं को देखकर यह सिद्ध होता है कि कबीर साहेब जी ही अविनाशी परमात्मा है जो अपने साधक को सर्व सुख देने में समर्थ है।

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Wednesday, 10 June 2020

बाइबिल के अनुसार परमेश्वर नराकार

बाइबिल के अनुसार परमेश्वर नराकार है


  • पवित्र बाइबिल के उत्पति ग्रंथ (पृष्ठ 2 पर अ. 1:25 - 2:5) में सृष्टि रचना में प्रमाण है कि परमेश्वर ने छः दिन में सृष्टि रची तथा सातवे दिन विश्राम किया।
  • मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं पवित्र बाइबल (उत्पत्ति ग्रंथ 1:29) प्रभु ने मनुष्य के खाने के लिए जितने भी बीच वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं मांस खाना नहीं कहा।

         



  • छठवे दिन मानव को परमेश्वर ने अपने स्वरूप में बनाने को कहा जो सब प्राणियों पर काबू रखें अर्थात स्पष्ट है परमेश्वर भी मानव सदृश्य नराकार है।
  • उत्पत्ति ग्रंथ 1:28 परमेश्वर ने उन्हें यह आशीष दी, "फलों फूलों और पृथ्वी को भर दो और उसे अपने अधिकार में कर लो समुद्र के जल चोरों आकाश की पक्षियों और भूमि के समस्त गतिमान जीव-जंतुओं पर तुम्हारा अधिकार हो" परमात्मा ने मांस खाने का आदेश नहीं दिया।
           



  • तब  परमेश्वर ने अपने ही स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में मनुष्य को उत्पन्न की तथा नर और नारी करके मनुष्यो की सृष्टि की।
              



  • उत्पती ग्रंथ के अध्याय 17 श्लोक 1 में कहा गया है कि जब अब्राम निन्यानवे वर्ष (99) वर्ष का हो गया तब यहोवा ने उसे दर्शन देकर कहा "मैं सर्वशक्तिमान हूँ मेरी उपस्थिती में चल और सिद्ध होता जा।"



  • फिर उत्पत्ति ग्रंथ के अध्याय 18 श्लोक 1 से 10 तथा अध्याय 19 श्लोक 1 से 25 में तीन प्रभुओं का प्रमाण है।


  • उपरोक्त विवरण से स्पष्ट हुआ कि परमेश्वर साकार है तभी अब्राम ने उनके दर्शन किये ।



  • पूर्ण परमात्मा जन्म मृत्यु से परे स्वयं ईसा मसीह जी की भी दर्दनाक मृत्यु हुई थी केवल कभी परमेश्वर ही अजन्मे अविनाशी हैं।



  • ईसा मसीह परमात्मा के पुत्र थे इसीलिए उन्हें सन ऑफ गॉड कहा जाता है परमात्मा कबीर साहेब ही सबके पिता हैं उत्पत्ति कर्ता है वही असली माता पिता भाई बंधु है ।


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Friday, 5 June 2020

kabir prakat diwas

✳️Rishi Ashtanand Ji (who used to take bath in Lahartara pond & perform sadhna there)saw the spectacle of a bright light descending in the Lahartara pond. He narrated the whole account to His Guru Ramanand that a mass of light came from the sky.
#623rd_GodKabir_PrakatDiwas



Kabir Prakat Diwas 2020

Wednesday, 3 June 2020

KabirPrakatDiwasNotJayanti

There is only evidence of the appearance of Kabir God in all four ages.
 For more information, see Satsang on Sadhana TV on June 5 from 09 to 11.00. Listen to Satsang on Sadhana TV.
 #KabirPrakatDiwasNotJayanti



Almighty Lord kabir descends and appears on Earth.
Kabir doesn't take birth from a mother's womb, manifests and lays himself in the form of an infant, on a lotus flower,
So this day Celebrated as "Prakat Diwas not a Jayanti




Tuesday, 2 June 2020

DeepKnowlegde_Of_GodKabir


तत्वज्ञान
कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन।


कबीर परमात्मा जी का बताया परम गूढ़ ज्ञान
कबीर परमात्मा ने अध्यात्म के बहुत से गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठाते हुए बताया है कि भक्ति को जिंदा रखने के लिए मैंने ही द्रोपदी का चीर बढ़ाया था और मैंने ही हिरण्यकश्यप तथा कंस को मारा था।

DivinePlay_Of_GodKabir


Lord Kabir acquainted ramanand ji with his real identity and showed him satlok, after which ramanand ji firmly believed that Lord Kabir is the creator of entire nature and is purn braham himself.



Lord Kabir acquainted ramanand ji with his real identity and showed him satlok, after which ramanand ji firmly believed that Lord Kabir is the creator of entire nature and is purn braham himself.
#3DaysLeft_KabirPrakatDiwas


जन्माष्टमी कितनी लाभदायक

जन्माष्टमी हिंदू त्यौहारों में से एक है और काफी उत्साह के साथ इसे भद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्ठमी को मनाई जाती है। कहते है इस दिन भगवान श...